लेखक: के.सी. त्यागी।।
केंद्र सरकार द्वारा जनेटिकली मोडिफाइड बीजों यानी जीएम फसलों के प्रयोग के संकेत से किसान व पर्यावरण संरक्षण संगठन चिंतित हैं। उनमें से कुछ ने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हाल ही में आनुवंशिक रूप से परिवर्धित यानी जीएम सरसों से जुड़ी टेक्निकल कमिटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया है।
मंत्रालय के अनुसार जनेटिक इंजिनियरिंग अप्रूवल कमिटी (जीईएसी) की उप-समिति द्वारा जीएम सरसों की किस्म ‘डीएमएच-11’ के जैव विविधता और कृषि पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कर रिपोर्ट जीईएसी को सौंपी जा चुकी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इससे जैव विविधता और पर्यावरण को किसी प्रकार का खतरा नहीं है। मतलब, सरकार जीएम सरसों को पर्यावरणीय मंजूरी देने का मन बना चुकी है। ऐसे में सरकार द्वारा विभिन्न पक्षों से 5 अक्टूबर तक मांगी गई जीएम संबंधी टिप्पणियां महज औपचारिकता हैं। वास्तविकता यही है कि मौजूदा केंद्र सरकार जीएम फसलों के उपयोग की पक्षधर है और इन्हें खेतों तक पहुंचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है।